जल्द दौड़ेगी इथेनॉल गाड़िया भारतीय सड़को पर भी।

जी हाँ, जल्द ही भारत में भी इथेनॉल फ्यूल से चलने वाली गाड़िया दिखाई देगी, यह साफ़ किया नितिन गडकरी, मंत्री सड़क परिवहन व राजमार्ग ने।

नितिन गडकरी जी ने कहा की मैंने BAJAJ और TVS के प्रबंधन को इथेनॉल आधारित बाइक और ऑटो रिक्शा बनाने के लिए कहा। उन्होंने इसे बनाया। मैं उन्हें अनुमति दे रहा हूं और ऑटो रिक्शा या बाइक या स्कूटर 100 फीसदी जैव-इथेनॉल पर चलेंगे।”

गडकरी जी ने कहा की कृषि रिसर्च से जुड़े संस्थानों ने तेल आयात पर देश की निर्भरता को कम करने के लिए जैव ईंधन (Biofuel) जैसे विषयों को उठाया। उन्होंने कहा कि पंजाब और हरियाणा में चावल के भूसे को waste के रूप में जला दिया जाता है, जिसके परिणामस्वरूप दिल्ली में प्रदूषण होता है। उनके अनुसार एक टन चावल के भूसे से 280 लीटर इथेनॉल का उत्पादन किया जा सकता है।

क्या होता है बायो-इथेनॉल फ्यूल (Bio Ethanol Fuel) ?

बायो-इथेनॉल फ्यूल (Bio-Ethanol Fuel) ethyl alcohol होता है जो की शराब/मदिरा में भी पाया जाता है। जिसका उपयोग वैकल्पिक ईंधन (alternative fuel) व ईंधन मिश्रण (fuel blend) के रूप में किया जाता है।

यह पारंपरिक ईंधन (conventional fuels) के विपरीत यह renewable energy source है, जिसका पुनः निर्माण संभव है। इसका निर्माण कृषि फीडस्टॉक (feedstock) जैसे भांग (hemp), गन्ना (sugarcan), आलू (potato), मक्का (corn), गेंहू का भूसा (wheat stock), चावल का भूंसा (rice stock), बम्बू (bamboo) आदि द्वारा बनाया जा सकता है।

इथेनॉल फ्यूल के उपयोग के लिए FFV (flexible fuel vehicles) की आवश्यकता होती है।

क्या है fuel blend व flexible fuel vehicle?

इथेनॉल ब्लेंड, पेट्रोल के साथ ईथनॉल का मिश्रण है। जिसे अलग-अलग अनुपातों  मिलाया जाता है।

भारत सहित कई देशों ने वाहन exhaust emissions को कम करने और कच्चे तेल (पेट्रोलियम) के कारण आयात बोझ को कम करने के लिए पेट्रोल में इथेनॉल को मिलाया जाता है। विभिन्न देशो में भिन्न-भिन्न इथेनॉल ब्लेंड को अपनाया जाता है, जिन्हे E10, E20, E85 आदि द्वारा इंगित किया जाता है। 

E10 या E20 से आश्रय क्रमशः 10% ya 20% इथेनॉल को 90% व 80% पेट्रोल/गैसोलीन के साथ मिलाने से है।

इसके उपयोग के लिए flex-fuel वाहन/इंजन की आवश्यकता होती है, एक फ्लेक्स-ईंधन वाहन 100% पेट्रोल/गैसोलीन, 100% इथेनॉल व दोनों के मिश्रण(gasohol) सभी पर काम करने में सक्षम होता है। 

किन देशो में होता है इथेनॉल का उत्पादन व प्रयोग ?

अकेले संयुक्त राष्ट्र व ब्राज़ील दुनिया का 87.1% इथेनॉल का उत्पादन करते है। U.S. इस सूची में शीर्ष स्थान  पर 15,330 मिलियन यूएस लिक्विड गैलन का सालाना उत्पादन, मुख्य रूप से मक्के (corn) द्वारा, वही ब्राज़ील गन्ने से सालाना 7,295 मिलियन यूएस लिक्विड गैलन इथेनॉल का उत्पादन करता है। यूरोप इसी पायदान में तीसरे, चीन चौथे व भारत 225 मिलियन यूएस लिक्विड गैलन इथेनॉल उत्पादन के साथ 7वे स्थान पर आता है।

ब्राज़ील दुनिया का सबसे बड़ा इथेनॉल-फ्यूल का उपभोगता है। 1977 में ब्राज़ील सरकार द्वारा E20 blended fuel (मिश्रण ईंधन) लाइट मोटर वाहनों के लिए अनिवार्य किया था। जिसे बाद में बढ़ा कर E25 किया गया। वर्तमान में ब्राज़ील ऑटो इंडस्ट्री flexible fuel वाहनों का निर्माण कर रही है जो गैसोलीन व इथेनॉल के किसी भी अनुपात के मिश्रण चल सकने के योग्य है। वही यूरोप तथा संयुक्त राष्ट्र में E10 से ले कर E85 इथेनॉल ब्लेंड वाले वाहन प्रचलन में है।

Performance on Ethanol Fuel?

Ethanol blend को इंजन में माइनर एडजस्टमेंट के साथ उपयोग में लिया जा सकता है। इथेनॉल में पेट्रोल के मुकाबले प्रति यूनिट वॉल्यूम की तुलना में 34% कम ऊर्जा होती है अर्थात पेट्रोल की तुलना में E100 इथेनॉल पर लगभग 34% कम माइलेज मिलता है। हलाकि इथेनॉल का octane नंबर (113) पेट्रोल (87-94) की तुलना में कई अधिक होता है। जो इथेनॉल को परफॉरमेंस के लिहाज़ से अधिक कुशल बनाता है। व इथेनॉल की octance रेटिंग अधिक होने के कारण इसके combustion के लिए high compression ratio की आवश्यकता होती है। जिसके लिए flexi-fuel engine में turbocharger या VGT(variable geometry turbocharger) की आवश्यकता होती है। 

हलाकि इथेनॉल फ्यूल व्हीकल्स में cold-start कंडीशन में पर्याप्त vapor pressure अर्जित न हो पाने के कारण दिक्कत का सामना करना पड़ता है। जिसके निजाद के लिए इथेनॉल के अनुपात में कमी या heating system का उपयोग करना अनिवार्य हो जाता है। यही कारण है की US व यूरोपीयन देश शीत ऋतु में इथेनॉल ब्लेंड को E85 से घटा कर E70 कर देते है।

 Ethanol फ्यूल के फायदे ?  || Advantages || 

  • Non-renewable pollutant के एवज में इथेनॉल एक अच्छा विकल्प है।
  • इथेनॉल के उत्सर्जन से निकलने वाली गैसे (exhaust gas emission) पेट्रोल की तुलना में कम हानिकारक होती है क्यूंकि इथेनॉल का combustion पेट्रोल की तुलना में अधिक कुशलता से होता है। 
  • इथेनॉल ब्लेंड E85 ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन को % कम करने में मदद करता है।  
  • इथेनॉल एक कभी न ख़तम वाला व renewable ऊर्जा का स्त्रोत है, जिसे शर्करा व स्टार्च (sugar & starch) युक्त किसी भी वनस्पति द्वारा इसका उत्पादन करना संभव है। उदहारण – गन्ना (sugarcane), मक्का।  
  • यह एक कार्बन न्यूट्रल प्रक्रिया है अर्थात इथेनॉल के निर्माण में जितना CO2 का उत्सर्जन होता है उतनी ही मात्रा में CO2 का ग्रहण प्रकाश संश्लेषण (photosynthesis) की क्रिया में वनस्पति द्वारा किया जाता है। 
  • इथेनॉल के जलन से उत्सर्जित द्रव्य पेट्रोल के जलन से उत्सर्जित द्रव्य की तुलना में sunlight के साथ कम प्रतिक्रियाशील(less reactive) होते है, जो की ओजोन परत में होते वाली शती को कम करने में मदद करते है। 
  • पर्यावरण को क्षति पहुंचने वाली ग्रीनहाउस गैस को कम उत्सर्जित करता है। हलाकि यह एक चर्चा का विषय है।
  • कृषि को बढ़ावा, जो की पर्यावरण के अनुरूप है।  

Ethanol फ्यूल के नुकसान  ?  || Disadvantages || 

  • कुछ रिसर्च के अनुसार इथेनॉल अधिक ग्रीनहाउस गैसे उत्सर्जित करता है। हलाकि इसपर कोई स्पष्ट मत साफ नहीं है। 
  • बायो-इथेनॉल के लिए बेहद अधिक मात्रा में जमीन की आवश्यता होगी। 
  • 100% इथेनॉल, 100% गैसोलीन की तुलना में 30 से 35 प्रतिशत कम फ्यूल माइलेज देता है। 
  • इथेनॉल की मांग बढ़ने पर अधिक रुझान एथनॉल के निर्माण वाली फसलों पर जाएगा, जिसके फलस्वरूप अन्य खाद्य पदार्थो में कमी आना संभव है, जिससे चीज़ो की कीमतों में वृद्धि आना संभव है। 
  • Flexi-fuel इंजन में उपयोग किये जाने वाले ईंधन के अनुरूप कम्प्रेशन रेश्यो में बदलाव के लिए fuel sensor का उपयोग इसके इंजन की कीमत में इजाफे के कारण बन सकता है। 
  • Cold-conditions में इंजन स्टार्ट में परेशानी होती हैं। 

क्यों है bio-ethanol भारत में जरुरी।     

  • भारत में फ्यूल के बढ़ते दाम होंगे कम। 
  • कृषि सेक्टर को मिलेगा बढ़ावा। 
  • कृषि क्षेत्र में उछाल से देश की अर्थव्यवस्था में होगा सुधार।
  • प्रदुषण पर आएगा नियंत्रण। 
  • वैकल्पिक फ्यूल को मिलेगा बढ़ावा। 
  • कृषि क्षेत्र की ओर बढ़ेंगे रोजगार। 
  • पेट्रोलियम (फॉसिल फ्यूल) के आयात में आएगी कमी।

 

कौन सी कंपनिया भारत में लाएगी इथेनॉल व्हीकल ? 

ऑटोमोटिव निर्माता भारत में E10 कारें (10% इथेनॉल, 90% पेट्रोल) बेच रहे हैं लेकिन भारत में अब तक E5 फ्यूल ही बिक रहा है। हाल ही में TVS व BAJAJ ने 100% इथेनॉल पर चलने वाली बाइक ईजाद की है। TVS ने अपनी इस flexi-fuel bike : TVS Apache RTR 200 को ऑटो एक्सपो – 2018 में भी शोकेस किया था। जिसकी मार्किट में बिक्री अक्टूबर माह से शुरू होने की सम्भावना है।

साथ ही भारत सरकार  बायो-इथेनॉल नीति के रूपरेखा की घोषणा भी कर चूका है जिसका उद्देश्य हर साल 1 अरब लीटर इथेनॉल उत्पादन करना है, व सरकार ने परियोजनाओं की स्थापना के लिए 5000 करोड़ रुपये के निवेश की घोषणा भी की है। साथ ही Volvo व Scania मुंबई तथा पुणे में मेथनॉल फ्यूल पर आधारित 50 बसों को भी जल्द ही लांच करेगा।

साथ ही सरकार का भारत में बायो-इथेनॉल में निवेश ब्राज़ील व संयुक्त राष्ट्र में flexi-fuel वाहनों को बेच रही कंपनियों को सीधा न्योता भी है।

बायो-इथेनॉल के सिवा भारत सरकार EV व अन्य वैकल्पिक फ्यूल (alternative fuel) पर भी ज़ोर दे रही है। जिसके चलते महिंद्रा, टाटा व हीरो मोटर्स अपने अपने सेगमेंट में इलेक्ट्रिक व्हीकल्स उतर चुके है। वही मारुती CNG कारे WagonR व Celerio के रूप में  भारत में ला चूका है। वही Honda भी अपनी CNG Activa स्कूटर को जल्द भारत में लांच करेगा।

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