मौत की गोद में झूलता भारत का ट्रक ड्राइवर | रिपोर्ट

अगर ट्रकिंग को भारत की संपन्न अर्थव्यवस्था की रीढ़ की हड्डी कहा जाये तो गलत नहीं होगा। क्यूंकि ट्रकिंग उद्योग हमारे देश के विकास को चलाने में एक अभिन्न भूमिका निभाता है। पर क्या आप जानते है ट्रकिंग एक ऐसा व्यवसाय है जिसमे नौकरी के दौरान मरने व घायल होने की दर अन्य किसी क्षेत्र से सबसे अधिक है ?

Kantar  IMRB, एक अग्रणी शोध संगठन ने कैस्ट्रॉल इंडिया (Castrol India) के सहयोग से एक महीने का शोध अध्ययन किया, जिसमें 1000 से अधिक ट्रकर्स शामिल थे। जिसका उद्देश्य ट्रकर्स द्वारा सामना किए जाने वाले स्वास्थ्य समस्याओं को समझने के लिए था। जो सीधे उनकी नौकरी और कामकाजी परिस्थितियों की खतरनाक प्रकृति से जुड़े है। 

इस रिपोर्ट का हाल ही में नई दिल्ली में सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री श्री नितिन गडकरी द्वारा अनावरण किया गया।

यह रिपोर्ट ट्रक चालकों की जीवनशैली में स्वास्थ्य के प्रति चालक कल्याण और व्यक्तिगत दृष्टिकोण को समझने के लिए भी तैयार की गयी। 

इस रिपोर्ट के अनुसार, 50% से अधिक ट्रकर्स ड्राइविंग से संबंधित स्वास्थ्य समस्याओं का सामना करते हैं। और इससे भी ग़ौरतलब है की 63% ट्रक चालकों के लिए उनका स्वास्थ्य, उनकी जीवन की शीर्ष तीन प्राथमिकताओं में शामिल नहीं है।

आपको यह जान कर हैरानी होगी की 50% ट्रक चालकों की प्रतिदिन यात्रा अवधि 12 घंटे से अधिक की हो जाती है। व इनमे 46% ट्रक चालक ऐसे भी है जो छह घंटे से अधिक समय तक लगातार ड्राइव करते है, बिना किसी ब्रेक के।

इन ट्रक चालकों के स्वास्थ्य और कल्याण को प्रभावित करने वाले मुद्दों में उनके, असामान्य रूप से लंबे समय तक काम करने वाले घंटों, घर और परिवार से दुरी, कठिन सड़क और ड्राइविंग स्थितियां आदि मुख्य रूप से उभरे है।

साथ ही ट्रक चालकों का अजीब और निश्चित मुद्राओं में ड्राइविंग जैसे जोखिम एर्गोनोमिक कारक, पीठ और गर्दन में मोड़ और तंग जगहों में काम करने और सोने के परिणामस्वरूप पीठ, गर्दन और जोड़ों में दर्द को जन्म देता है। ट्रक चालकों के बीच स्वास्थ्य की यह लापरवाही को ये निम्न कारक ओर बढ़ते है :-

  • खराब ड्राइविंग बुनियादी ढांचे
  • ख़राब मेंटेनेंस वाले ट्रक
  • स्वच्छ भोजन की कमी
  • आराम करने के लिए जगहो में कमी
  • कम मजदूरी
  • अनियोजित ड्राइविंग कार्यक्रम
  • घर से लंबी अनुपस्थितियां/दूरी

नतीजतन, अधिकांश ट्रक चालक सभ्य जीवन व्यतीत करने के लिए संघर्ष करते समय अपने स्वयं के स्वास्थ्य की अनदेखी करते हैं।

इस चिंताजनक विषय पर बात करते हुए कैस्ट्रॉल इंडिया के प्रबंध निदेशक ओमर डॉर्मन ने कहा, “ट्रकिंग उद्योग हमारे देश के आर्थिक विकास और समृद्धि में एक महत्वपूर्ण योगदानकर्ता है और देश के आगे बढ़ने में ट्रक चालक महत्वपूर्ण बल हैं। देश में ट्रकिंग उद्योग की शुरुआत से ही ट्रकर्स के साथ कैस्ट्रॉल का लंबा और घनिष्ठ संबंध रहा है।उनकी सुरक्षा और कल्याण में सुधार के लिए हमारे पास कई कार्यक्रम हैं। हाल के सर्वेक्षण से निकलने वाले परिणामों की संज्ञान लेते हुए, हम उन समाधानों को खोजने में और प्रयास कर रहे हैं जो समाज के इस वर्ग द्वारा सामना की जाने वाली कुछ चुनौतियों को कम कर सकते हैं।”

 कट्रोल इंडिया ने मुंबई के “The Yoga Institute” के साथ मिल कर इन मुद्दों पर ओर जांच की व इसके हल के लिए कार्य कर रहा है। जिसका नतीजा योग आसन की एक श्रृंखला के रूप में निकला जा रहा है। जिसे ट्रक आसन।(The Truck Aasanas) नाम दिया गया है। 

अगले छह महीनों में, कैस्ट्रॉल देश भर में ट्रकर्स के साथ इन योग आसनों को साझा करने की दिशा में काम करेगा, जिससे उन्हें अपने स्वास्थ्य और कल्याण पर ध्यान केंद्रित करने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा।

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