जानिये कितने नम्र है हम गाडी चलाते वक़्त। #FordCartesy

अमेरिकन कंपनी फोर्ड की सब्सिडरी फोर्ड इंडिया ने हाल ही एक रोचक सर्वे किया जिसका नाम था, Cartesy. Cartesy शब्द एक अंग्रेजी शब्द Courtesy मेल खता है। जिसका मतलब होता है विनम्रता। आइये जानते है इस सर्वे में क्या रिजल्ट्स रहे हमारे देश के अलग अलग शहरो के।

सर्वे में 3 बड़े मापदंड रखे गए :

  1. आज्ञाकारिता (Compliance) अगर कोई यातायात पुलिस न हो तब भी हमे गाडी ट्रैफिक लाइट पर रोकनी चाहिए।
  2. सावधानी (Caution) जैसे कभी भी ईरफ़ोन लगाकर रोड पार नहीं करे।
  3. दयाभाव (Compassion) जैसे कभी भी हॉस्पिटल के पास हॉर्न नहीं बजाना चाहिए।

इन तीनो मापदंड को लेकर कुछ लोगो से पूछे गए जो नीचे दिए हुए है:

Compliance

ये इन सवालों को लेकर भारत के 10 शहरो में गए और इन 10 शहरो में इन्होने हज़ारो लोगो से ये सारे सवाल पूछे।

32 % लोग अपनी गाड़ी अधिकर्त पार्किंग स्थान में पार्क नहीं करते है और 48 % लोग फूटपाथ पर पार्क करते है। ३३ % लोगो ने माना की तय सीमा से कम उम्र में ड्राइविंग सही है।

51 % लोग रक्षा की पहली पंक्ति के रूप में सीटबेल्ट के बारे में नहीं जानते जबकि 22 % लोगो स्वीकार किया की वो वाहन चलाते वक़्त मोबाइल इस्तेमाल करते है।

41 % प्रतिशत चालक दुर्घटना के शिकार को अस्पताल नहीं ले जाते जबकि 37% लोग अपनी या दुसरो की परवाह नहीं करते है।

कोलकाता और लुधिअना सबसे विन्रम मेट्रो और गैर मेट्रो शहर है।

महिलाए अधिक सतर्क और आज्ञाकारी है जबकि पुरुष अधिक दयावान है। अनुपालन, सावधानी और दया के मापदंडो में 28 से 34 वर्ष की आयु वर्ग बेहतर है।

सर्वे में ये भी पाया गया की हमे कोई भी डिग्री या सर्टिफिकेट की जरूरत नहीं है यातायात के नियम पालन करने के लिए लेकिन फिर भी कई लोग जो की शिक्षित है वो लोग भी ट्रैफिक नियम का पालन नहीं करते है और न ही सीटबेल्ट का उपयोग करते है।

22% लोगो ने कहा की यातायात पुलिस की अनुपस्तिथि में वे यातायात संकेत पर नहीं रुकेंगे और 22 प्रतिशत के करीब लोगो ने कहा की अगर की यातायात नियमो के तोड़े जाने पर वे यातायात पुलिस कर्मी द्वारा पकड़े जाते है तो वे प्रभावशाली और सत्तादारी लोगो का सहारा लेंगे।

फोर्ड का ये सर्वे दिखता है कि भले हमारे अंदर कितनी भी नम्रता हो मगर हम जैसे गाड़ी ड्राइव करने लगते है तो हमारी सारी नम्रता ख़त्म हो जाती है और हम यातायात के नियम भी अनुसरण करते है। और उसकी वजह हमे और साथ में अन्य लोगो को भी खामियाजा भुगतना पड़ता हैँ।

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